Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 74
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 74
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हिन्दी अर्थ
फूलों की लता
कोकिल के धीरे-धीरे फूलों की पेंखुरियों के छेदन को भले सहन कर सकती है, किन्तु चील, गीध,
जलकाक, बगुला, मुर्गा ओर कौए के छेदन को कदापि नहीं सह सकती