Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 76
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 76
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हिन्दी अर्थ
उपवन में तान सुनने के प्रेमी लोगों
के आगे कोयल का मनोहर बच्चा कोमल वाणी से महोत्सवतुल्य कथा कर अनायास सब लोगों का
ज्योंही मनोरंजन करता हे त्योहीं कौए ने आकाश से बाग में उतर कर यह मेरा बच्चा है, मैं ने पाला
है, यों काँव-काँवरूपी रूक्ष वाणी से सब श्रोताओं को निरुत्साह कर दिया