Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

पश्यात्र नाथ सरसः कमलोत्पलकुमुदबिसमृणालानाम् । कह्लारपत्रपयसा भारानादाय बालिकाश्चलिताः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

मालती की कहीं से भी तनिक भी न फूली हुई शूलसदृश कठोर कली के ऊपर बैठा हुआ भ्रमर कालरुद्र द्वारा शूलपर पिरोया हुआ अन्धकार-सा मालूम पड़ता है