Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 33
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हिन्दी अर्थ
राजन् देखिये, आकाश में हंसी का पीछा कर रहा हंस इस सरोवर के मध्य
में प्रतिबिम्बित, ्ूले के सदृश कमलरूप घोंसले में स्थित हंसो को देखकर उसके गिरने और
डूबने की आशंका से मूर्छित हो गया है