Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 34
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हिन्दी अर्थ
हँस की-सी स््रीव्यस्ननिता की (सत्रीलग्पटता की) कड अनुचर निन्दा करता हैं /
हे राजन्, अत्यन्त सत्रीलम्पटता किसी की भी न हो । देखिये न, तालाब में प्रतिबिम्बित इस
हंसी का अनुसरण कर रहे (पीछा कर रहे) बेचारे हंसने प्राण गँवा दिये