Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 35
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हिन्दी अर्थ
राजन्, राजहंस ने
अनायास जो मनमोहक मधुर कूजन (ध्वनि) किया, उसे बगुला पुरे सौ वर्षो मे भी बोलना नहीं
सीख सकता