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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 36

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

राजहंस और हंस का जन्मस्थान, आकृति, जाति, चेष्टा, आहार, नाम और रंग सब कुछ समान है । फिर भी साधारण हंस ओर राजहंस में महान्‌ अन्तर है, महान्‌ अन्तर है । राजहंस सुवर्णं पद्मो में विचरते हैं, समुद्र मेँ गोता मारकर मोती चरते हैं एवं जहाँ किसी भी पक्षी की पहुँच नहीं है ऐसे आकाश के ऊपरी भाग में उडते हैं, साधारण हंसो मे यह बात कहाँ है यह भाव है