Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 37
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हिन्दी अर्थ
सफेद डैनों से आकाश में स्थित तथा कुमुदाकर की शोभा वढानेवाला हंस उदित हुए
चन्द्रमा के समान लोगों के चित्तो को आह्नादित करता है (८)