Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 38
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हिन्दी अर्थ
ऊपर को उठे हुए नालदण्डवाली
नलिनियों के नालरूपी कदलीस्तम्भं से भरे हुए कमलवन में विहार कर रहे हंसों की शोभा को कौन
दूसरा पक्षी पा सकता है ? यह सरलार्थ है । योग से जिसके नाल ऊपर को की गई है ऐसी
हृदयकमलरूपी नलिनी के प्राणायामअभ्यास से विकासवश कदलीस्तम्बवत् स्तम्ब से व्याप्त हृदय
कमलत्रयरूप वन में त्रिविधतापहारी निरतिशय आनन्द के आस्वाद से सदा विहार कर रहे यतियो
की जीवन्मुक्तिसुख साम्राज्यरूप सम्पत्ति को कौन देवता पा सकता है, यह गूढार्थं है