Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
पश्चाज्जातः कलकलरवः संतते पान्थसार्थे दीनालापैर्व्यसनविधुरैरालेपन्ते च मेघम् ।
कष्टं पान्थो मृत इति महारम्भसंपन्नहाहाशब्दः प्रोद्यत्पथिकवनिताविस्तृतोरःप्रहारः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे नरनाथ, पूर्वोक्त वचन कहनेवाली रूठी हुई अपनी प्रिया को मनाने के
लिए यह बटोही मार्ग के पुष्पलता निकुंजों से भरे क्रीडातट वन में बड़े जतन से अपनी प्रेयसी का
अनुनय विनय करता है, कृपया आप देखिये