Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

लोकेनायं मृत इति ततो बाष्पसंपूरिताक्षं शावीं पूजां विरचितवता संचयीकृत्य दारु । दग्धुं नीतोऽस्म्यतिभयमहं प्रज्वलच्चित्यनन्तप्रोद्यत्स्फोटस्फुटपटपटारावरौद्रं श्मशानम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

को पार्श्वचर इसी पथिक जोड़े के (सत्री-पुरुषों के) चर को ढिगाई के साथ कह रही वेश्या को राजा के लिये दिखलाता हैं / हे राजन्‌ हाव, भाव, विलास, शरीर को मटकाना, कोप,कटाक्ष, ओर हास कर रही वेश्या उक्त पथिक जोड़े का चरित्र कहती है, कृपया आप देखें