Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

पश्य कल्पद्रुमस्यास्य पल्लवे पल्लवे वने । विश्रान्ताः सुरसुन्दर्यो गायन्ति च हसन्ति च ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

मूर्छित अपनी प्रिया को यह बेचारा पति नलिनी के पत्तों के पंखे से तथा जल से कैसे प्रकृतिस्थ करता हुआ मूर्च्छित प्रिया को गले लगाकर यहाँ मन्दराचल के निकुज में वैठा है