Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मन्दिरं मन्दपालस्य मन्दरे मृदुमन्दिरे ।
मुनेरिदमुदारस्य भार्या सा यस्य पक्षिणी ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर प्रिया के पूछने पर देखो यह उसी कथा को पास मेँ बैठी हुई अपनी
प्रिया से उसकी दुड़ी पकड़कर कहता है