Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
तमालतालतरललीलान्दोलनलालिताः ।
अनिलाजलकल्लोलोत्क्रान्तकोमलपल्लवाः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अरे
भाई मेघ, तुम्हारे गले मेँ गुण है यानी तुम गुणवान् हो । गुणशाली अपने योग्य इन्द्रधनुष को लेकर,
हे सुन्दर आकाशमार्गचारी, तुम मेरी प्रिया के समीप जाकर जिनसे जल की बूँदे गिर रही हों ऐसे अपने
वायुओं से पहले उसे ढाढस देना फिर मेरा सन्देश पहुँचाने के लिये धीरे-धीरे गर्जना, क्षणभर के
लिये दया करना, कारण कि तुम्हारे गंभीर गर्जन को मेरे वियोग दुःख से अश्रुपूर्णमुखी बालकमलनाल
के सदृश कोमल शरीरवाली कृशांगी मेरी प्रिया सहने मेँ असमर्थ है