Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ललन्नवलतावान्तपुष्पधूलिविधूसराः ।
सरन्ति मरुतो मन्दमुद्यानेषु नृपा इव ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मेघ, उस प्रिया का चित्तरूपी
तूलिका से हृदयरूपी आकाश पर चित्र लिखकर मैने आलिगन किया, अभी ही न मालूम वह यहाँ
से कहाँ चली गई