Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
न ददाति फलं किंचिदर्थिने न च पल्लवम् ।
तालः स्तम्भतयाऽऽरम्भं ह्यरूपैव विनाऽऽकृतिः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके पश्चात् पथिक लोगों ने यह मर गया है, ऐसा निश्चय कर आँखों में
आँसू भर कर शवोचित पूजा (चन्दन, माला आदि से सजावट) की तथा लकड़ियाँ उद्रेजक तथा
अत्यन्त भीषण श्मशान में ले गये