Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

विपश्चित ऊचुः । पञ्चभूतात्मकस्यास्य दृश्यस्यान्तं सुरेश्वर । देहेन मन्त्रदेहेन तदन्ते मनसापि च ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

चंचल मंजरीराशिरूपी बिजली के संग से युक्त तथा काला तमालवृक्ष चातक को व्यर्थ ही मेघ की भ्रान्ति कराता है