Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 32
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हिन्दी अर्थ
पुंनाग के वृक्षों पर विश्राम कर रहे सुन्दर सुवर्णकी-सी कान्तिवाले
हेमचूड नाम के पक्षी (एक प्रकार का पीला पक्षी) स्वर्ग में देवताओं के समान शोभा पाते हैं ॥३ १॥
भ्रमर और मेघरूपी धुएँ से पूर्ण फूले हुए चम्पको के वन जब वायु से हिलते हैं तब जल रहे पर्वत से
मालूम पडते है, देखिये