Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 33
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हिन्दी अर्थ
उत्कण्ठित कोयल (मादा) कनेर के पेड की ऊपर की शाखारूपी
झूले में झूल रहे अपने प्रिय कोयल का आलिगन कर मधुर गाना गा रही है