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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 34

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे राजन्‌, कलकलध्वनिपूर्वक उपायन (भेंट) हाथ में लिये हुए राजाओं से पूर्ण क्षीरसमुद्र की इन तटभूमियों को देखिये