Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 35
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और उत्तर क्षारसागर तक इस जम्बू द्वीप में भीषण युद्ध में
बचे हुए नरपतियों को अपने चरणों के आसन बनाइये अर्थात् उनके मस्तक पर पदार्पण द्वारा उनपर
अनुग्रह कीजिये ओर तत्-त्त मण्डलो की पृथिवी का प्रत्येक दिशा में चिरकाल तक रक्षा के लिए
शास्त्रानुसार (नीतिशास्त्र में वर्णित प्रकार से) समाधानपूर्वक शान्त बुद्धि से शासन दिजिये, उसके
पश्चात् अस्त्र-शस्त्र दिजिये ओर उसके पश्चात् विशाल सेना दीजिये