Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 122, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 122, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 122 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
पाण्डुडिण्डीरपिण्डेषु कुर्वन्तो लाघवात्पदम् ।
श्वेतपद्मपरिक्रान्तराजहंसश्रियं दधुः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, वर माँगने के पश्चात् बड़वानलरूप से समुद्र में प्रवेश करने
के लिए त्वरा कर रहे अग्निदेव 'ऐसा ही हो” कहकर क्षणभर में सहसा चले गये