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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 122, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 122, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 122 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

पदक्रमेणैव महार्णवान्तस्तावत्प्रविष्टा अवलोकितास्ते । तटस्थितैर्यावददृश्यभावं शरन्नभोमेघलवा इवापुः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

ओहो ! हम लोग देवाधिदेव अग्नि के प्रताप से बिना किसी क्लेश-आयास के बहुत दूर मार्ग में आ पहुँचे है