Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 124, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
रूढमर्णवमालासु वात्यासु जलवीचिषु ।
क्रीडितं भूभृदब्धीनां तटीषु नगरीषु च ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पश्चिम
विपश्चित् पक्षियों की वशीकरण विद्या में पारंगत था, अतएव पहले उसे गरुड़ ने पीठ पर
बैठाकर समुद्र पार किया था । वह शाल्मली द्वीप के शाल्मली पेड़ पर पक्षी के घोंसले में उसके
साथ क्रीडावश दस वर्ष तक रहा