Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 124, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तस्याच्छत्वात्तथाभूतमात्मैवात्मनि बिम्बति ।
तादृशस्य तथाभूतौ मुकुरस्येव निर्मला ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उन चार विपश्चिता में से पश्चिम दिगन्त
को देखने के लिए प्रवृत्त विपश्चित् को अपने को अमर समझने वाली विष्णुमीन कुल में उत्पन्न मछली
निगल गई, जिसका वेग अत्यन्त शीघ्र बहनेवाली व्यास नदी की नौका के सदृश अत्यन्त तीखा था