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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 124, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

एकलोहमया एव यथादर्शाः परस्परम् । तथैते प्रतिबिम्बन्ति पदार्थाः पारमार्थिकाः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

उसे पचाना सरल न था, अतएव उस मछली ने क्षीरसागर में पहुँचर उसे उगल दिया । तदनन्तर क्षीरसागर को लाँघकर वह दूर दिगन्तर को गया