Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 126, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

मकरोदरमांसाशी मृते मकरनायके । मकरोदरतोऽब्धेश्च निर्गतो मकरो यथा ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रबुद्ध लोगों के प्रति सव वस्तुएँ मनोमात्र ही हैं, इस पक्ष में तो सब जगह सवर्थि-क्रिया मनोराज्य की भाँति अत्यन्त उपपन्न है, इस आशय से कहते हैं। बोधाकाश (चिदाकाश) जब अपने स्वरूप से थोड़ा च्युत-सा होता है तब शीघ्र ही मनोभावलक्षण किंचित्‌ च्युतिरूप देश से ज्यों-का-त्यों सुस्थित होता हुआ भी अन्यता को (जगद्रूपता को) ग्रहण करता है