Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, Verses 23–26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 126, verses 23–26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

प्राप्तो दशसहस्राणि योजनानां महामहीम् । सौवर्णीं सुरसंचारसरणिं मृतवानसौ ॥ २३ ॥ तस्यां भूमौ च मध्ये च विपश्चिन्नाकितामगात् । उत्तमामग्निमध्यस्थं क्षणात्काष्ठमिवाग्निताम् ॥ २४ ॥ प्रधानदेवो भूत्वासौ लोकालोकगिरिं गतः । अस्य भूमण्डलतरोरालवालमिव स्थितम् ॥ २५ ॥ स पञ्चाशत्सहस्राणि योजनानां समुन्नतः । आलोकलोकाचाराढ्यो भाग एकोऽस्य नेतरः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, आपने मुझसे पूछा कि योगी व्याप्त होकर कैसे विविध काम करते हैं ? मैंने यहाँपर प्रबुद्ध योगियों का वर्णन किया है, विपश्चित्‌ तो प्रबुद्ध योगी नहीं थे, यों वस्रिष्ठजी समाधान करते हैं। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे निष्पाप श्रीरामजी, मैंने आपके प्रश्न के समाधान के लिये विपश्चितों के सिलसिले में जिन योगियों का वर्णन आपसे किया है, वे प्रबुद्ध थे, किन्तु विपश्चित्‌ प्रबुद्ध नहीं थे