Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 126, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 63
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हिन्दी अर्थ
इससे जीवन्मुक्त लोगों में राग, द्वेष आदि के आभास का दर्शन होने पर भी मुक्ति के संदेह का
खण्डन किया गया, यह दशति हुए उपसंहार करते है ।
जीवन्मुक्त चिदाकाश के प्रति राग और द्वेष का क्षय या उदय होने पर सुचरित्रता सत्ता ओर
दुश्चरित्रता का अभाव होनेपर आविर्भूत स्वरूपवाले मोक्ष में तनिक भी संशय नहीं हे