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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, Verse 64

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 126, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 64

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

भ ब्रह्म नहीं हूँ" ऐसी भेदबुद्धि रहने पर ही मुक्ति में संशय होगा, वही उनको नहीं है, ऐसा कहते है । ब्रह्माकार के तुल्य शुद्ध चरम साक्षात्कार वृत्तिरूप ज्ञान से जो असंग, अद्वितीय पूर्ण ब्रह्मभाव से आकाश सदृश धर्मो को (देह, मन, प्राण आदि को धारण करनेवाले जीवों को) प्राप्त करते हैं उन जीवन्मुक्तो में भेदभ्रान्ति में हेतुभूत अज्ञान के नष्ट होने से फिर भेदबुद्धि कैसे हो सकती है ?