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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 127, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 127, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 127 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

दूरत्वादृक्षचक्रस्य करालत्वान्महागिरेः । क्वचित्तमः क्वचित्तेजस्तत्रैवाचत्वरेऽपि च ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

चिदात्मा में ही आकाशताप्रतीतिरूप आकाशात्मकता को प्राप्त हुए उन विपश्चितां ने मानसिक प्रतिभासमात्र के विषय प्रातिभासिक देह में आधिभौतिक देहताप्रयुक्त स्थूलता, जडता आदि भावों को सामने देखा