Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 127, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 127, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 127 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
लोकालोकगिरेः पारे स्थितादाकाशमण्डलात् ।
दशदिक्कं सुदूरेण ऋक्षचक्रं विवर्तते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह निश्चित् देह के अज्ञानात्मक होनेपर यह दृश्य
पृथिवी आदिरूप अविद्या कितनी बड़ी होगी यह देखने के लिए पूर्वसंस्कारवश वे प्रस्तुत हुए