Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 127, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 127, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 127 · श्लोक 29
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हिन्दी अर्थ
उसके बाद यह कन्दुकाकार (गेंदाकार) भूगोल
समाप्त हो गया । उसके बाद अन्धकार से परिपूर्णं महापरिखाकार प्राणियों से शून्य आकाश है