Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 128, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 128, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 128 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अस्मदादेर्जनस्यैतत्प्रत्यक्षं नानुमानिकम् । शुद्धबोधशरीरेण नाधिभौतिकरूपिणा ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, यह निराधार भूगोल केसे स्थित है, नक्षत्र मण्डल, जिसका कोई आधार नहीं हे, कैसे भ्रमण करता है तथा आपने जिस लोकालोक पर्वत का वर्णन किया वह कैसा हे यानी उसकी उक्त संज्ञा का क्या कारण हे ?

सर्ग सन्दर्भ

एक सौ छब्बीसवाँ सर्ग समाप्त एक सौ सत्तारईसवों सर्ग॑ भूमि, नक्षत्रमण्डल आदि की स्थिति उसके पश्चात्‌ आकाश तदनन्तर ब्रह्माण्ड के दो खप्परों का वर्णन |