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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 128, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 128, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 128 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

सर्वेषामुत्तरे मेरुर्लोकालोकश्च दक्षिणे । येषामित्यनुमाऽशेषभूतौघे तेन पण्डिताः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

दीवार आदि के आधार में रहता है तथापि काल्पनिक स्तम्भ आदि के अवास्तविक होने से उनसे धारण किया हुआ नहीं है, वही दशा पृथिवी आदि की भी है