Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
मनोमनननिर्माणमात्रमेतज्जगत्त्रयम् ।
शान्तं तनु लघु स्वच्छं वातान्तः सौरभादपि ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
शान्त, पवन के अन्दर स्थित सुगन्ध या प्रकाश से भी अति सूक्ष्म, लघु और स्वच्छ यह
त्रिलोकी मन के मनन की रचनामात्र है