Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 130, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 130 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तं समालोकयन्वह्निं विविक्षुः क्षीणदुष्कृतः ।
पश्चादुपससाराशु दूरं सिंह इवोत्पतन् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानरूपी उजाला प्राप्त होने पर वह थोड़े से
समय में शान्त हो जाती है, सूर्योदय होनेपर अन्धकारशोभा की नाई निःशेष नष्ट हो जाती है