Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 130, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 130 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
आययौ पूर्वजन्मभ्यो ध्यानालोकाद्व्यबुध्यत ।
सभामालोकयामास समुत्थाय यथाक्रमम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अविद्या का आर पार देखने के
लिये मोक्ष होने तक उक्त विपश्चित् नक्षत्रमण्डल की तरह आकाशमार्ग से गया