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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 132, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

प्रतिक्षणं सुखैर्दुःखैर्देशकालैः समागमैः । सरिद्वारिवदालोला नवमायान्ति यान्ति च ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महाराज, तब वे कहते है कि हम लोगों को उद्योग करनेपर भी भूमि का अन्त प्राप्त नहीं हुआ । इसके बाद हम आगे बढ़ें