Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 134, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 134, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 134 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
पिण्डाहार्यामदुर्गन्धिगुण्ठीकृतककुब्गणम् ।
रक्तगर्भाभ्रनिर्व्यूहैः खादिरज्वलनोज्ज्वलम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान् अग्नि ने कहा : वत्स, जब तक शव के गिरने से उत्पन्न हुआ उत्पात पूर्णरूप
से शान्त नहीं हो जाता तब तक त्वरा का त्याग कर तुम क्षणभर प्रतीक्षा करो उसके बाद मेँ तुमसे सब
कर्हुगा