Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 135, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 135, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 135 · श्लोक 45
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हिन्दी अर्थ
हाय, चन्दन ओर मन्दार ओर कदम्ब के वृक्षों के वनों
से अलंकृत तथा विविध पुष्पों की राशियों का मण्डप-सा वह सुन्दर मलयाचल कहाँ चला
गया ?