Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 138, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 138, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 138 · श्लोक 41
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हिन्दी अर्थ
अमूर्तआकारस्वभाव नित्य अनन्त उदित चिद्रूप परमाणु का सार
ही भ्रान्तिवश जगत् कहा गया हे