Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 139, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 139, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 139 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
सदारः सहभृत्योऽहं सपुत्रः सहबान्धवः ।
सहभाण्डोपस्करणः सगृहोऽपहृतोऽम्भसा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राजकुमार
श्रीरामजी, जैसे यह त्रिजगत् ब्रह्म ही है और जैसे यह विविध रूप है इस विषय में आगे कहा जा रहा
अध्यारोप क्रम आप सुनिये