Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 139, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 139, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 139 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
उह्यमानं क्षयाम्भोभिस्तद्गृहं तच्च पत्तनम् ।
लङ्घ्यमानं द्रुमाकारैः पूर्यमाणं च वारिभिः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले अधिष्ठान का निर्देश करते है ।
निर्मल, अनन्तआकाशस्वरूप, सनातन और सर्वस्वरूप चिन्मात्र ही है, न जगत् है और दुश्यता
है