Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 139, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 139, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 139 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
स्फुटत्कुड्यत्रुटत्काष्ठरटच्छङ्कुकृतोद्रटम् ।
प्रपतच्छादनच्छत्रगवाक्षस्थाङ्गनामुखम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे इस प्राणता को वह
कल्पित सी जानता हे, वैसे ही इन्द्रिय, देह आदि ओर दिशा, काल आदि को भी कल्पितसे ही
जानता है