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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 140, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 140 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अन्यच्च विपिनाधीश मयैतत्तव वर्णितम् । स्वप्नदृष्टं किल स्वप्ने किं न संभवतीह कम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस पुरुष का यह मैं हूँ इस प्रकार का भ्रान्तिज्ञान है, उसका वह भ्रान्तिज्ञान आत्मज्ञान के सिवा अन्य किसी साधन से शान्त नहीं हो सकता है