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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 140, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 140 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

व्याध उवाच । असदेतद्यदि विभो स्वप्नसंभ्रममात्रकम् । कथितेन तदैतेन कोऽर्थः कल्याणकोविद ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

दढतर तत्त्वज्ञान की प्राप्ति के लिए यह ग्रन्थ ही उत्तम उपाय है, ऐसा कहते हैं। मोक्ष-प्राप्ति के उपायभूत शास्त्र के विचार के बिना अन्य से ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता इसलिए यत्नपूर्वक मोक्ष के उपायभूत इस शास्त्र का निरन्तर विचार करना चाहिये