Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 140, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 140 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
मुनिरुवाच ।
त्वद्बोधनात्मकं कार्यं महदस्त्यत्र बुद्धिमन् ।
एतद्भ्रमात्मकं वेत्ति भवान्सत्यं तु मे श्रृणु ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
"अहम्" (मैं) “इदम्”
(यह) यह दुविधा (द्वैत) ही अविद्या है, इससे अन्य अविद्या कहीं भी नहीं है, उक्त अज्ञान (अविद्या)
मोक्षउपाय के सिवा अन्य किसी भी साधन से नहीं हटता (नहीं विनष्ट होता)