Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 141, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 141, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 141 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
ज्वालाजालनवोड्डीतिमण्डलैरखिलैर्नभः ।
अलातचक्रवच्चारु केवलं भ्रान्तवानहम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
महामुनि ने कहा : हे व्याध, आकाश में भ्रान्तिज्ञानरूप ये सकल जगत् कल्पान्त मे भ्रान्तिरूप नाना
प्रकार के विनाशो से विनष्ट होते हैं