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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 145, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 145, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 145 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

वल्लीवलयविन्यासविलासवलिताङ्गिकाः । वनमाला विलोलाम्बुप्रणालीकाकलीकलाः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त में सब पदार्थ स्थित हैं, यह कैसे ज्ञात होता है 2 इस प्रश्नपर कहते है । देखिये न, स्वप्न में एक ही चिन्मात्र लाखों रूपों में स्थित होता है, स्वप्न में स्थित लाखों रूपों से सुषुप्ति मे जाकर एक ही हो जाता है, इससे चित्त में सब पदार्थ स्थित हैं यह स्पष्ट है